मान्यता है कि भवनत्रिक में पीत तथा तीन अशुभ लेश्या होती हैं और अशुभ लेश्या अपर्याप्तक अवस्था में ही होती हैं।
तत्तवार्थसूत्र में ऐसा कोई नियम और बाध्यता नहीं है, यही आचार्य श्री विद्यासागर जी भी कहा करते थे।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 29 अप्रैल)
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भवनत्रिक में लेश्या को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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