मतभेद मुर्दों में नहीं; सर्वज्ञों में भी नहीं, क्योंकि वे तो अनंत-पक्षीय दृष्टिकोण रखते हैं। संसारियों का मतिज्ञान क्षायोपशमिक होता है। इसलिये स्तर-भेद रहता है।
मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना:।
मत-भिन्नता से अनंतानुबंधी।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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4 Responses
मत एवं मन भेद को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मन भेद को समाप्त करना परम आवश्यक है।
जब मतों में भिन्नता होती है तो आसानी से सुलह नहीं होती, बहुत लंबे समय तक दुश्मनी जैसी हो जाती है। धर्म के नाम पर अपन ख़ुद अनुभव करते हैं कितना बैर भाव होता है।
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मत एवं मन भेद को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मन भेद को समाप्त करना परम आवश्यक है।
मत-भिन्नता से अनंतानुबंधी kaise hoti hai ? Ise clarify karenge, please ?
जब मतों में भिन्नता होती है तो आसानी से सुलह नहीं होती, बहुत लंबे समय तक दुश्मनी जैसी हो जाती है। धर्म के नाम पर अपन ख़ुद अनुभव करते हैं कितना बैर भाव होता है।
Okay.