मूर्ति
पहले मूर्तियों के सिर पर बाल दिखाये जाते थे, आजकल बिना बालों की मूर्तियों का प्रचलन क्यों ?
दोनों तरह की मूर्तियां पहले भी होती थीं, आज भी हैं। बिना बालों वाली मूर्तियां का प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि किसी मुनिराज ने केशलोंच किया और उसी समय उनको केवलज्ञान हो गया।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान- 22 अप्रैल)




One Response
मूर्ति का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः मूर्तियों में भिन्नता होना परम आवश्यक है।