भगवान वृषभनाथ ने अपनी बेटी ब्राह्मी को लिपि देवनागरी(विद्या) सिखाई थी, भाषा नहीं।
दुर्भाग्य आज हम हिंदी को भी रोमन लिपि में लिख रहे हैं, देवनागरी में नहीं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 3 जुलाई)
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लिपि का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए लिपि को देवनागरी में होना परम आवश्यक है।
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लिपि का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए लिपि को देवनागरी में होना परम आवश्यक है।