प्रगति में महत्त्वपूर्ण अवरोध, पूर्व के मूढ़ता वाले विचार होते हैं। उनसे हम डिगना/छोड़ना नहीं चाहते हैं। जब तक उनकी तेरहवीं नहीं करेंगे तब तक नया जन्म नहीं हो सकता है।
(पीयूष जैन – दिल्ली)
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विचार को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए विचार पवित्र एवं विशुद्ध भाव रखना परम आवश्यक है।
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विचार को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए विचार पवित्र एवं विशुद्ध भाव रखना परम आवश्यक है।