वैक्रियिक शरीर में सप्तधातु नहीं होती है। पर नारकियों के शरीर में अशुभतर होती है,
क्योंकि उनको शारीरिक रोग/ कष्ट होते हैं,
पहले से सातवें नरक में बद से बदतर।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 3/03)
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स्पत धातु को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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स्पत धातु को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।