समाधिमरण के समय संबोधन कम करना चाहिए। शरीर शिथिल हो रहा होता है, अधिक संबोधन अतिभारारोपण हो जाएगा और उसके भाव ख़राब हो सकते हैं। व्यक्ति के भावों को महसूस करें, उसके प्रति सद्भाव रखें, आसपास का वातावरण पवित्र और धार्मिक बनायें।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 1 मई)
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समाधिमरण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए समाधिमरण में उक्त विचारों का पालन करना परम आवश्यक है।
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समाधिमरण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए समाधिमरण में उक्त विचारों का पालन करना परम आवश्यक है।