साधना
भावना… मन में उस भाव को बार-बार लाना ताकि मन उस भाव के लिए तैयार/ संस्कारित हो जाए। जैसे 16 प्रहरी पीपल बहुत असरदार होती है। पाँच-पाँच भावनाएँ महाव्रतियों के लिए पर देशव्रती भी भाएँगे।
भावना मन से भाई जाती है, व्रत/ संकल्प बुद्धि से लिए जाते हैं। व्रत प्रारंभिक साधना है। मन तथा बुद्धि को एक करना ही साधना है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 7/3)




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साधना का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु साधना का मार्ग स्वीकार करने पर मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होना परम आवश्यक है। जीवन में जितने भी निग़र्थ साधु है वह साधना के मार्ग पर चलने पर ही अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में समर्थ हो सकतें हैं।