स्वतंत्रता दिवस
1947 से पहले का भारत Physically गुलाम था, पर आज का भारत दिमागी तौर पर Ethically गुलाम है।
गुणों का नीलाम होना ही गुलाम बनाता है।
आज तो हिंदी को भी रोमन लिपि में लिखा जाता है। यह जानते हुए भी कि देखने का प्रभाव 83% होता है, इसीलिए आदिनाथ भगवान ने भाषा नहीं लिपि सिखाई थी। पराधीनता का निमंत्रण-पत्र प्रमाद की मिठाई के साथ ही दिया जाता है।
फिरंगियों ने असन(भोजन), वसन(वस्त्र) और आसन का प्रलोभन देकर हमें पराधीन किया। जिसमें हम आज तक फंसे हुए हैं।
ग्वालियर के श्री अमरचंद बांठिया कोषाध्यक्ष(सिंधिया राजा) ने सेनानियों की सहायता के लिए कोष खोल दिया था और इसीलिये अंग्रेजों ने उन्हें तीन दिन तक फांसी पर लटकाए रखा था।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 1 से 15 अगस्त)




7 Responses
स्वंतंत्रता दिवस का विस्तृत विवरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है एवं प़शशीनिय है। स्वतंत्रता मिल गई है लेकिन उसके लिए देश में भारतीय संस्कृति का विकास एवं इन्डिया की जगह भारत बोलना परम आवश्यक है, इसके अतिरिक्त मातृभाषा का उपथोग करना परम आवश्यक है।
‘आसन’ ka meaning clarify karenge, please ?
Post/ position.
Okay.
हिंदी को रोमन लिपि में kaise likhte hain ? Yeh clarify karenge, please ?
जैसे तुमने लिखा है… kaise likhte hain ?
It is now clear to me.