कहा है –> गुरु-उपदेश से वैराग्य होने पर रस बेरस लगने लगते हैं।
तो क्या मिष्टान्न का मीठापन समाप्त हो जाता है?
लालमणी भैया
नहीं, मिष्टान्न का मीठा स्वभाव तो वैसा ही है। लेकिन मैं जो इंद्रिय सुखों के आनंद को अपना स्वभाव मानता था, उसे अब विभाव मानने लगा।
चिंतन
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स्वभाव को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए इद़ियों पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। अतः वैराग्य की भावना का स्वभाव बनाना आवश्यक है।
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स्वभाव को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए इद़ियों पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। अतः वैराग्य की भावना का स्वभाव बनाना आवश्यक है।