Month: April 2025
रोग और निदान
रोग पैदा तो होता है मन में, पनपता है शरीर में। जिस क्षेत्र में रोग होता है, निदान भी उसी क्षेत्र में पाया जाता है।
आकिंचन
वह अमीर अमीर क्या जिसका मन फ़कीर न हो! वह फ़कीर फ़कीर क्या जिसका मन अमीर न हो! जीवन जब तक खुला नहीं, खिला नहीं
सातिशय पुण्य
सातिशय पुण्य क्या है ? प्रिया सातिशय पुण्य मतलब जिसमें अतिशय हो (जैसे मुनी बनना)। यह पुण्यानुबंधीपुण्य के बहुत ऊपर की अवस्था है। मुनि श्री
सुख
सुख की तासीर है सुप्तता। सो सुख में सावधानी अत्यंत आवश्यक है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
सामान्य केवली और तीर्थंकर
सामान्य केवली और तीर्थंकरों में वही अंतर है जो सामान्य सांसद और प्रधानमंत्री में। प्रधानमंत्री भी सांसद होता है पर सांसद प्रधानमंत्री नहीं। सामान्य केवली
जीवन प्रकाशित
जीवन प्रकाशित तब होता है जब सूर्य के सामने से भावकर्म रूप बादल हट जायें, द्रव्यकर्म रूप खिड़की बंद तथा नोकर्म रूप आँखें खुल जाएँ।
कुज्ञान
प्यासे को मिर्च खिला दो तो पानी तो आएगा पर कंठ में नहीं, आँखों में दिखेगा। लेकिन प्यास बुझाएगा नहीं। यह तो मृगमरीचिका से भी
प्रेम / रागादि
प्रेम जीव से, गुरु गुण देखकर। रागादि (द्वेष/ मोह) शरीर से होता है, क्षणिक। प्रेम की अधिकता होने पर द्रव्य-दृष्टि बनायें। द्वेष की अधिकता होने
प्रमाद / लोभ
मनुष्य पर्याय बहुत पुरुषार्थ से मिली है।यदि हमने प्रमाद( गर्मियों में तो बिस्तर भी कहता है कि जल्दी उठ, पसीने से बिस्तर तर हो रहा
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