Month: April 2025
कर्म / पुरुषार्थ
रोग/ मुसीबतें तो पूर्व कर्मों से आती हैं। वर्तमान के पुरुषार्थ से कम/ समाप्त कर सकते हैं। पर हम दोष वर्तमान के निमित्तों को देते
भूमि दान
चार प्रकार के दान बताए गए। भूमि-दान कौन से दान में आएगा? उस भूमि में मंदिर, धर्मशाला या संत भवन बनेगा तो आवास-दान हो गया।
दिगम्बर मुद्रा
जैन धर्म में सबसे प्राचीन होते हैं तीर्थंकर। हम जिसको रोल मॉडल बनाते हैं उनका बल्ला आदि कुछ अपने पास रखकर अपने को कृतार्थ फील
भगवान / भववान
आत्मायें दो प्रकार की → भगवान = भग (काम) + वान (नष्ट)। ये अल्प आरम्भ/ परिग्रह तथा शील पालन से। भववान → जो भवों में
आचरण
आचरण स्थायी गुणों से ही तय होता है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान- 26 फ़रवरी)
अहिंसा
श्री बाल गंगाधर तिलक ने कहा था … अहिंसा का उपदेश तो अन्य मतों में भी है पर जैन धर्म में इसका आग्रह पूर्वक पालन
गति/आयु बंध
आयुबंध की तुलना में गति-बंध का इतना महत्व नहीं क्योंकि आयु-बंध के साथ तथा बाद में भी वही गति-बंध होता रहता है जो आयु-बंध बंधी
मोह
शुरु में मोह छोड़ना कठिन है। जिनवाणी में रुचि बढ़ाने से मोह अपने आप कम होता जाता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान –
दान
एक घर से बहू लाये, दूसरे घर में बेटी दी। लगाव/ खिंचाव किधर ज्यादा होगा ? बेटी की ओर। कारण ? जहाँ दिया जाता है
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