Month: April 2025

कषाय

कषायों का काम कर्मों को रुकने लायक व्यवस्था करना तथा अनुभूति में आने योग्य तीव्रता डालना होता है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान-

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मृत्यु

जब मृत्यु निश्चित है तो डर क्यों? अपने कर्मों तथा कर्म-सिद्धांत पर विश्वास की कमी। ध्यान/ Meditation के अभ्यास की कमी (जो ध्यान में मृत्यु

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राग और मोह

आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज कहा करते थे… राग और मोह दोनों ही आत्मा से भिन्न हैं। मोह अटकाव है जबकि राग भटकाव। मोह

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उपकार

प्राय: हम उन पर उपकार करते हैं जिन्होंने पहले हम पर उपकार किया हो। यदि सभी यही सोचेंगे तो उपकार करने की पहल कौन करेगा

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भय

भय अपरिचित वस्तुओं, स्थान या व्यक्ति से ही होता है जैसे रस्सी को भी अनजाने में साँप मानने लगते हैं। सबसे अपरिचित आत्मा है इसीलिए

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ज्ञान

ज्ञान की प्रमाणिकता जानने का साधन ? चारित्र। तभी तो कहा है → बिना अभ्यास ज्ञान विष समान। चारित्र ज्ञान की भाषा है। कुलीनता/ अकुलीनता,

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मंदिर निर्माण

क्या वास्तु दोष भगवान के मंदिरों पर भी प्रभाव डालते हैं ? वास्तु का अर्थ है भवन और मंदिर भी एक भवन ही है। ग्वालियर

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ज्ञानसार

शिष्य सालों तक गुरु से ज्ञान अर्जित करता रहा। गुरू → क्या समझे ? कुछ नहीं। गुरु → तो, सार को समझ लो, पुद्गल और

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प्रतिक्रमण

प्रतिक्रमण में श्रमण अपने को जड़ बुद्धि, पापी आदि से संबोधित करता है पर श्रावक उन्हें ज्ञानी और पुण्यात्मा आदि कहते हैं। यही तो अनेकांत

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मंगल आशीष

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April 15, 2025