Month: June 2025
मूलगुण
मुनिराजों के 28 मूलगुण आदिनाथ भगवान के समय से ही नहीं, अनादिकाल से हैं। वरना आदिनाथ मुनि उनका पालन कैसे कर रहे थे ! मुनि
अनर्थ फल
प्रश्न: पाप का अनर्थफल क्या है ? उत्तर: मन का अस्तव्यस्त/अशांत होना। -आचार्य श्री अमोघवर्ष कृत प्रश्नोत्तर-रत्नमाला (गाथा सं 15) यह पाप का प्रत्यक्ष/तुरंत मिलने
ब्रह्मचर्य
संसार रूपी भ्रम को पहचान कर ब्रह्म को चरना/ आचरण करना ब्रह्मचर्य है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
समाधिमरण
समाधिमरण के समय संबोधन कम करना चाहिए। शरीर शिथिल हो रहा होता है, अधिक संबोधन अतिभारारोपण हो जाएगा और उसके भाव ख़राब हो सकते हैं।
आचरण
आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास एक विद्वान रोजाना स्वाध्याय करने आते थे। जाते समय भक्ति पूर्वक नमस्कार भी करते थे। एक दिन नमस्कार करना
प्यास
नीर नहीं तो, समीर सही प्यास, कुछ तो बुझे। भावार्थ – अत्यधिक गर्मी में पानी भले न मिले परन्तु ठंडी हवा चलती रहे तो प्यास
रागी / वीतरागी
वीतरागी रागी को अपना जैसा बना सकते हैं जबकि रागी वीतरागी को नहीं। कहा है “वंदे सदगुण लब्धये” (वंदना उसकी करो जिसके गुण पाना चाहते
परोपकार
एक दीपक दूसरे को प्रकाशित करते समय अपनी बाती/ घी/ प्रकाश नहीं देता फ़िर भी दूसरा प्रकाशित हो जाता है/ उसके जीवन से अंधकार समाप्त
सुपार्श्वनाथ भगवान
सुपार्श्वनाथ भगवान तथा पार्श्वनाथ भगवान दोनों की मूर्तियों पर सर्प दिखता है फ़र्क़ क्या है? पार्श्वनाथ भगवान के उपसर्ग में देव रक्षा करने आया था
बच्चों को नियम
आज पलायन बहुत हो रहा है। गांव से शहर, शहर से मेट्रो और मेट्रो से विदेश जाने होड़ लगी हुई है। बच्चों को बाहर भेजने
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