Month: November 2025

मार्दव धर्म

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… मार्दव धर्म मेज के कोने जैसा है, जिनको गोल कर दिया गया हो। इससे खुद भी सुरक्षित और

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जैन साधु

जैन साधु की पहचान, पदयात्री तथा करपात्री। पदयात्री – जीवनपर्यन्त पैदल चलते हैं। करपात्री – जीवनपर्यन्त हाथ में भोजन करना/ बर्तनों में नहीं। मुनि श्री

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कर्म / दुःख

कर्म दुःख दे सकता है पर दुखी नहीं कर सकता वरना कर्म तो 10वें गुणस्थान के ऊपर भी हैं। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन

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नारियल

नारियल को “श्रीफल” इसके अनेक गुणों के कारण कहते हैं। अन्य फलों से इसमें एक और विशेषता होती है कि यह रस अलग से बनाता

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चतुष्टय

स्वचतुष्टय = स्व(द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव)। स्वचतुष्टय से ही अनंतचतुष्टय । भाव ठीक नहीं पर दोष गढ़ते हैं बाकी 3(द्रव्य, क्षेत्र, काल) पर। अपनों के

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क्षत्रिय

जो पापों पर घात करे, उन्हें जीते वह क्षत्रिय । मुनि श्री अजितसागर जी (सबसे बड़े दुश्मन तो पापकर्म ही हैं)।

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सूतक

सूतक में दर्शन करने तो जाते ही हैं यानी फर्श को छूते हैं, जो नवदेवता में से एक है। फिर फर्श पर रखी हुई चीजें

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भूत / भविष्य

भूत को यदि नहीं भुलाओगे तो भविष्य भूलना पड़ेगा। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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क्षायिक-दान

सिद्धों में क्षायिक-दान कैसे घटित करेंगे ? सिद्धों को ध्यान/ अनुभूति में अपने पास लाकर अभय का अनुभव कर। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र

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समाधि

उपधि = परिग्रह। उपाधि = बौद्धिक बीमारी, मेंटल नहीं। बुद्धि को मेन्टेन नहीं कर पा रहा, इसीलिए तो उपाधि चाहिए। इन दोनों से जब व्यक्ति

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मंगल आशीष

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November 25, 2025