चतुष्टय

स्वचतुष्टय = स्व(द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव)।
स्वचतुष्टय से ही अनंतचतुष्टय ।
भाव ठीक नहीं पर दोष गढ़ते हैं बाकी 3(द्रव्य, क्षेत्र, काल) पर।
अपनों के आने पर काल का पता नहीं लगता पर काल आने पर अपना कौन है, पता लग जाता है। इसलिए काल आने से पहले शुभ कार्य कर लें ।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 27 अक्टूबर)

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4 Responses

  1. चतुष्टय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए भावों में द़व्य, क्षेत्र, काल का असर पढता है।

  2. ‘भाव ठीक नहीं पर दोष गढ़ते हैं बाकी 3(द्रव्य, क्षेत्र, काल) पर’ ; Is statement ka meaning clarify karenge, please ?

    1. भाव ठीक नहीं पर हम दोष देते हैं बाकी तीनों को। द्रव्य ठीक नहीं, हमारा समय भी ठीक नहीं चल रहा, पंचम काल है आदि। इसीलिए कहा था कि भाव तीनों पर हावी हो जाता है, अच्छे में भी बुरे में भी।

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