Month: November 2025
समर्पण
समर्पण में अपने व्यक्तित्व, अस्तित्व को मिटाया जाता है। जैसे आचार्य श्री समयसागर जी ४० वर्ष तक आचार्य श्री के संघ में मौनी बनकर रहे।
आत्मदर्शन
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… यदि अपनी आत्मा के दर्शन/ अनुभूति नहीं कर पा रहे तो दूसरों में आत्मा के दर्शन/ देखना शुरू
वचन / भाषा
दो इन्द्रिय से पाँच इन्द्रिय तक वचन/ भाषा अक्षरात्मक तथा अनक्षरात्मक भी होती है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 2/3)
शरीर
शरीर को पूज्य बनाने के दो तरीके… 1) शरीर को पूरा अपना मानो। तब ऐसे काम होंगे ही नहीं कि कोई निरादर कर पाए। 2)
दु:ख
दु:ख हमारे जीवन में पाप से आते हैं। परिग्रह एक पाप है यानी हमारे जीवन में दुःख परिग्रह से आ रहे हैं। फिर वह परिग्रह
वर्ण लाभ/संकर
वर्ण लाभ… दोनों वर्णों को लाभ जैसे दूध और पानी। वर्ण संकर… दूध में नीबू जैसे देहाकर्षण से शादी/ गुणवत्ता को गौण करके। मुनि श्री
जन्म कल्याणक
क्या मुनिराज पंचकल्याणक के अवसर पर जन्म कल्याणक में शामिल हो सकते हैं? आगम में आया है कि जब भगवान का पांडुकशिला पर जन्माभिषेक होता
मोह
क्रोध, मानादि AC Current हैं, Shock देते हैं। मोह DC, चिपका लेता है, जब तक पूरा न चूस ले। आचार्य श्री विद्यासागर जी
नैगम नय
द्रव्य नैगम नय… अयोग्य राजकुमार को राजा कहना, राजा बन भी सकता है न भी बने। भावी नैगम नय… अरिहंत को सिद्ध कहना, नियम से
सम्मान
त्याग की मूर्तियों के सामने गृहस्थों का सम्मान करना कहाँ तक उचित है ? त्यागियों के सामने त्याग का सम्मान करना तो तर्कसंगत है ही
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