समर्पण में अपने व्यक्तित्व, अस्तित्व को मिटाया जाता है।
जैसे आचार्य श्री समयसागर जी ४० वर्ष तक आचार्य श्री के संघ में मौनी बनकर रहे। जब बाहर निकाला तब उनके ज्ञान ने संसार को चमत्कृत कर दिया।
मुनि श्री विनम्रसागर जी
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समपर्ण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गुरुओं के प़ति समपर्ण का भाव रखना परम आवश्यक है।
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समपर्ण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गुरुओं के प़ति समपर्ण का भाव रखना परम आवश्यक है।