Month: January 2026

जिनवाणी

जिनवाणी तो नय रूप है । लेकिन इसके निमित्त से सम्यग्दर्शन/ ज्ञान प्रमाण रूप प्राप्त किया जा सकता है । मुनि श्री मंगलसागर जी

Read More »

“पर” देखना

“पर” को देखना ही है तो उनको देखो जिन्होंने “पर” को देखना बंद कर दिया है। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी

Read More »

ध्रुवता

दीपक का प्रकाश(पुद्गल), बुझने पर पुद्गल रूप धुआँ/ अंधकार रूप लेना, प्रकाश की ध्रुवता है। स्वयंभू स्तोत्र – 24

Read More »

व्यक्तित्व

वर्तमान के क्रियाकलाप मेरे व्यक्तित्व का सही से निर्धारण नहीं कर सकते। मैं क्या नहीं कर पा रहा हूँ, वह सही निर्धारण करेगा। निर्यापक मुनि

Read More »

असाता

असाता करने से असाता का बंध होता है, चाहे वह धार्मिक क्रियाओं के लिए ही क्यों न हो । आधे जीवन तक असाता की तो

Read More »

त्याग

त्याग से ही व्यक्ति बड़ा/ महान बनता है, भोग से नहीं (नीचे ही जाता है)। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

Read More »

दर्शन

अन्य दर्शन… ईश्वर (अवतार) प्रेरित। जैन दर्शन… चारित्र प्रेरित, सामान्य आदमी/ गुरु/ अरिहंत द्वारा। ब्र. डॉ. नीलेश भैया

Read More »

व्यक्ति / गुण

व्यक्तियों से जुड़ोगे तो मोह। गुणों से जुड़ोगे तो धर्म। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

January 21, 2026