प्रत्याख्यानावरण कषाय सर्वघाती क्योंकि चारित्र (सकल) नहीं होने देती। संज्वलन देशघाती क्योंकि चारित्र होने देती लेकिन यथाख्यात चारित्र ना होने देने की अपेक्षा सर्वघाती।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड – 3 मई)
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देश एवं सर्वघाती कषाय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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