दस धर्म

क्षमा, मार्दव, आर्जव – भाव हैं, क्योंकि उनमें कुछ त्याग नहीं करना।
सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग – उपाय हैं, इनमें त्याग करना है।
तब आकिंचन्य, ब्रह्मचर्य सार बन जाते हैं।

मुनि श्री सुधासागर जी

Share this on...

5 Responses

  1. मुनि श्री सुधासागर महाराज जी ने दस धर्म की परिभाषा पर उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है! अतः धर्म से जुडकर जो दस धर्मो का पालन करता है वही अपना कल्याण करने में समर्थ हो सकता है!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

March 12, 2023

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031