जीना
जीना चाहूँ तो
जीना चढ़ने हेतु
वरना क्या जीना !
आचार्य श्री विद्यासागर जी
जीना चाहूँ तो
जीना चढ़ने हेतु
वरना क्या जीना !
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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One Response
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने जीने को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए धर्म से जुडना परम आवश्यक है ताकि देव शास्त्र एवं गुरुओं पर श्रद्वान हो सकता है।