चार प्रकार के लोग….
1) भाग्यवान… जिनके पास वर्तमान में धन वैभव हो।
2) सौभाग्यशाली… वैभव के साथ स्वास्थ्य भी अच्छा हो।
3) महा-सौभाग्यशाली… धन, स्वास्थ्य और धर्म के परिणाम हों।
4) दुर्भाग्यपूर्ण… तीनों में से कुछ भी ना हो।
आर्यिका श्री शुभ्रमति माता जी संघस्थ आर्यिका श्री पूर्णमति माता जी
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आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने लोगों के प़कार को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः महा सोभाग्यशाली बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।
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आर्यिका श्री पूर्णमती माता जी ने लोगों के प़कार को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः महा सोभाग्यशाली बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।