पहले से पांचवें कुलकर के समय में सज़ा “हा” (गुनाह किया है)।
छटवें से दसवें कुलकर के समय में सज़ा “हा, मा” (मान लिया, भविष्य में नहीं करना)।
ग्यारहवें से चौदहवें कुलकर के समय में सज़ा “हा, मा, धिक” (धिक्कार)।
मुनि श्री मंगल सागर जी
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6 Responses
सज़ा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सज़ा से बचने का प़यास करना परम आवश्यक है।
1st sentence ( “हा”) me bhi ek tarah se गुनाह ka acceptance hai. To phir, wo 2nd sentence (“हा, मा”) se kaise different hai?Ise clarify karenge,please?
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सज़ा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सज़ा से बचने का प़यास करना परम आवश्यक है।
1st sentence ( “हा”) me bhi ek tarah se गुनाह ka acceptance hai. To phir, wo 2nd sentence (“हा, मा”) se kaise different hai?Ise clarify karenge,please?
पहले में प्रतिक्रमण है, दूसरे में प्रतिक्रमण के साथ प्रत्याख्यान भी।
‘पहले में प्रतिक्रमण है, दूसरे में प्रतिक्रमण के साथ प्रत्याख्यान भी।’Ise thoda aur clarify karenge,please?
पहले तो खाली मान लेने से ही दोबारा नहीं करते थे। फिर थोड़े और ढीट हुए तो आगे के लिए कसम भी दिलानी पड़ती थी कि आगे नहीं करोगे प्रॉमिस करो।
Okay.