समता
सूर्य ही एक ऐसा नक्षत्र है जिसकी सुबह और शाम की लालिमा एक सी होती है/ उन्नति और अवनति के समय समता भाव। प्रकाश और ताप देते समय भी कभी भेदभाव नहीं करता, सबको समान रूप से देता है और बदले में कुछ पाने के भाव भी नहीं रखता।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन- 26 अप्रैल)
साँझ-सकारे/ क्षितिज पर खिलें/ रंग होली के,
उगे या ढले/ सूरज आह्लादित/ रंगत वही,
हानि लाभ में/ जीवन मरण में/ समरसता।
-कमल कान्त जैसवाल




One Response
समता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए समता भाव रखना परम आवश्यक है।