दो मिलते जुलते शब्द हैं सेलफिशनेस और दूसरा सेल्फओरिएंटेड। तुच्छ उपलब्धियां के पीछे भागना सेल्फिश्नेस है जबकि सेल्फओरिएंटेड को उच्च उपलब्धियां मिलती हैं। निःस्वार्थ सेवा सेल्फओरिएंटेड ही कर सकता है, सेल्फिश तो कहेगा क्यों करूँ ?
मुनि श्री सौम्य सागर जी (डाक्टर सम्मेलन – प्रवचन – 2 मार्च)
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निस्वार्थ सेवा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए निस्वार्थ सेवा के भाव रखना परम आवश्यक है।
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निस्वार्थ सेवा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए निस्वार्थ सेवा के भाव रखना परम आवश्यक है।