विचार / शरीर
जब तक हमारे विचारों में शुद्धि, सामर्थ्य तथा एकता न हो,
शरीर के कोशिकाओं की तंदुरुस्ती, सामर्थ्य तथा एकता को बनाए रखना असम्भव है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
जब तक हमारे विचारों में शुद्धि, सामर्थ्य तथा एकता न हो,
शरीर के कोशिकाओं की तंदुरुस्ती, सामर्थ्य तथा एकता को बनाए रखना असम्भव है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
One Response
विचार एवं शरीर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए विचारों में पवित्रता एवं सामर्थ्यवान होना परम आवश्यक है।