आचार्य श्री विघासागर महाराज ने भक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए भगवान् की भक्ति से कर्म बंधते नहीं है, बल्कि जो कर्म काटने में समर्थ होता है। Reply
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आचार्य श्री विघासागर महाराज ने भक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए भगवान् की भक्ति से कर्म बंधते नहीं है, बल्कि जो कर्म काटने में समर्थ होता है।