इष्ट/अनिष्ट
इष्ट/अनिष्ट स्थायी नहीं रहते।
माँ बचपन में इष्ट, शादी के बाद पत्नी फिर बच्चे, वृद्धावस्था में भगवान।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
इष्ट/अनिष्ट स्थायी नहीं रहते।
माँ बचपन में इष्ट, शादी के बाद पत्नी फिर बच्चे, वृद्धावस्था में भगवान।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी