गणधर के शिष्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः गणधर के शिष्य के लिए सम्यक् चारित्र होना परम आवश्यक है। Reply
सम्यग्दर्शन के साथ सम्यग्ज्ञान तो हो ही जाता है इसलिए उसकी अलग कैटेगरी बनाने की जरूरत नहीं थी वैसे भी सम्यग्दर्शन ज्यादा आदरणीय है सम्यग्ज्ञान से। Reply
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गणधर के शिष्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः गणधर के शिष्य के लिए सम्यक् चारित्र होना परम आवश्यक है।
Yahan par ‘Samyakgyaan’ ka naam kyun nahi hai ? Ise clarify karenge, please ?
सम्यग्दर्शन के साथ सम्यग्ज्ञान तो हो ही जाता है इसलिए उसकी अलग कैटेगरी बनाने की जरूरत नहीं थी वैसे भी सम्यग्दर्शन ज्यादा आदरणीय है सम्यग्ज्ञान से।
Okay.