हम शरीर से ही पूरे जिंदा दिखते हैं।
मन से आधे (क्योंकि कोई भी हमारा मन तोड़ जाता है)।
आत्मा से तो हम पूरे ही मरे हुए हैं।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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जिंदा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए शरीर को नश्वर समझना चाहिए एवं आत्मा की पहिचान करना एवं आत्मा के कल्याण के लिए प़यत्न करना परम आवश्यक है।
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जिंदा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए शरीर को नश्वर समझना चाहिए एवं आत्मा की पहिचान करना एवं आत्मा के कल्याण के लिए प़यत्न करना परम आवश्यक है।