दान
अभक्ष्य खाने वाले को, अभक्ष्य देना दान में नहीं आएगा।
क्योंकि दान तो स्व-पर हितकारी होता है। अभक्ष्य देने में स्व का अहित तो है ही, “पर” का भी धार्मिक/ आत्मिक स्तर पर अहित होगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
अभक्ष्य खाने वाले को, अभक्ष्य देना दान में नहीं आएगा।
क्योंकि दान तो स्व-पर हितकारी होता है। अभक्ष्य देने में स्व का अहित तो है ही, “पर” का भी धार्मिक/ आत्मिक स्तर पर अहित होगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
One Response
दान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन के कल्याण के लिए दान उदारता पूर्वक एवं स्वयं के हित के लिए मन्दिर का निर्माण, भगवान् विराजमान करना, आहार दान, उपकरण दान, औषधि दान एवं किसी को मदद करना ही परम आवश्यकता है। अभक्ष्य दान पाप की श्रेणी में आया है, अतः उससे बचना आवश्यक है।