Category: वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
मोक्ष प्राप्ति में देरी
दो बच्चे देर से स्कूल पहुँचे, शिक्षक के देर से आने का कारण पूछने पर एक बच्चे ने बताया कि – उसका 1 रूपये का सिक्का
मुनि श्री क्षमासागर जी के प्रवचन
पूज्य गुरूवर मुनि श्री के मंगल प्रवचन जिनवाणी चैनल पर प्रात: 10.30 बजे, सायं 5:25बजे एवं रात 9.15 प्रसारित हो रहे हैं । मंगल प्रवचन सुनकर
भविष्य
हम जिस तरह आज जीते हैं, उसी तरह आगे के जीने के लिये भी हम तैयारी कर लेते हैं । (इस जन्म में तथा अगले
परवाह
अभी मुझे और धीमे कदम रखना है, अभी तो चलने की आवाज़ आती है । “अपना घर” – मुनि श्री क्षमासागर जी
दान
दान देने की planning मत करो, दान देने की आदत बना लो । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
दान
एक कंजूस सेठ थे। धर्म सभा में आखरी पंक्ति में बैठते थे। कोई उनकी ओर ध्यान भी नहीं देता था। एक दिन अचानक उन्होंने भारी
केवलज्ञान
एक चित्रकार था दूसरा विचित्रकार( विचित्र चित्रकार), दोनौं में competition हुआ – एक हाल की एक दीवार चित्रकार को दी गयी और दूसरी विचित्रकार को ।
अभिमान/स्वाभिमान/निरभिमान
अभिमान – कोई जब तक बहुत आग्रह/इज़्ज़त से खाने पर नहीं बुलाये, तो हम नहीं जायेंगे । स्वाभिमान – खाने पर गये, देखा उन्हें कष्ट
दौलत
दो लात मारे वह दौलत । जब दौलत आती है तब सीने पर लात मारती है, सीना फूल जाता है । जब जाती है तब
अहंकार
हीनता का भाव भी अहंकार पैदा करता है । दूसरे के सम्मान में अपना अपमान मानना भी अहंकार है । मुनि श्री क्षमासागर जी
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