Category: वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
क्रोध
क्रोध से बचने के उपाय – विलम्ब करें । कारणों और औचित्य पर विचार करें । सकारात्मक सोचें । वातावरण को हल्का बनाऐं । मुनि
क्षमा
शांत-स्वभावी की क्षमता बढ़ जाती है। झगडे में शोर बहुत होता है, सुलह शान्ति से होती है । आत्मा का स्वभाव झुकना है, पर हम
ब्रम्ह्चर्य
पर के पास जितना जाओगे, आत्मा से उतने ही दूर हो जाओगे । शुक देव को 20 साल की अवस्था में वैराग्य हो गया ओर
संसार
एक मालिक रोज चुटकुला सुनाता था, और सब Employees जोर जोर से हंसते थे, एक दिन एक Employee नहीं हंसा, कारण बताया – मैं नौकरी
दुःख
एक दुःखी आदमी देवता के पास जाकर बहुत दुःखी हुआ, उसकी शिकायत थी कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा दुःख मुझे ही क्यों मिले हैं
ईमानदारी
ईमानदारी की नाव में बेईमानी के छेद करके, नदी पार करना चाहते हैं । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
श्रीफल
श्रीफल – नमकीन पानी को मीठा करके लौटाता है, इसलिये भगवान / गुरु पर चढ़ता है। मुनि श्री क्षमासागर जी
धनतेरस
धनतेरस को जैन आगम में धन्य तेरस या ध्यान तेरस भी कहते हैं । भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के
दिगम्बरत्व
मुसलमान समुदाय के अबुल कासिम गिलानी और सरमद, औरंगजेब बादशाह के समय फ़कीर हुये, जिन्होंने दिगम्बरत्व को अपनाया । बादशाह के पूछ्ने पर कि आप
गुरू
दवा की शीशी पर पूरे Ingredients , बीमारी का नाम तथा लेने की विधि लिखी रहती है, फिर भी Under Direction Of Doctor लिखा जाता
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