Tag: मुनि श्री वीर सागर जी

बंधन

सांसारिक बंधन पुराने जूते जैसा होता है – पता ही नहीं लगता कि पैर जूते में फंसा है । पता तब लगता है जब जूता

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मन

मन रूपी खेत में यदि अच्छे विचारों की फसल नहीं बोयी तो घास तो उगेगी ही । मुनि श्री वीर सागर जी

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इच्छा

इच्छाओं को इच्छाशक्ति में परिवर्तित करना होगा । निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

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गुरू

गुरू आदेश नहीं, निर्देश देते हैं । निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

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मंगल आशीष

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