Tag: मोक्ष
संसार / मोक्ष
संसार – संयोग संबंध बनाना/सच्चा मानना, मोक्ष – संयोग संबंध छोड़ना/झूठा मानना ।
बारह भावना
बारह भावना में मोक्ष क्यों नहीं ? समिति, गुप्ति आदि धार्मिक क्रियाओं से संवर; तपादि से निर्जरा और इनकी पूर्णता का नाम ही तो मोक्ष
मोक्ष
मोक्ष में प्रमुखता तप की नहीं (तप तो मिथ्यादृष्टि भी कर लेता है), प्रमुखता तो वैराग्य की होती है । मुनि श्री विनिश्चयसागर जी
मोक्ष / मुक्ति
आज के युग में “मोक्ष” तो संभव नहीं है, पर मुक्ति संभव है – कमज़ोरियों/बुराईयों आदि से ।
प्रश्न / उत्तर
सबसे बड़ा प्रश्न चिंह है- “संसार” , (इसका) सबसे छोटा उत्तर है – “मोक्ष” ।
मोक्ष
मोक्ष का मार्ग तो बिलकुल सीधा है, इसीलिए टेड़ी चाल वाले इस मार्ग पर नहीं चल पाते । (दिव्या-लंदन)
मोक्षसुख
मोक्ष है भी या नहीं ? संसार छोड़ दें और मोक्ष हो ही नहीं तो ? आचार्य श्री – अमृत है या नहीं, पर क्या
मोक्ष
अच्छे विचार, अच्छे चिंतन को जन्म देते हैं । अच्छे चिंतन, अच्छे संस्कार का निर्माण करते हैं । अच्छे संस्कार, अच्छा चारित्र गढ़ते हैं ।
दीपावली
हम लक्ष्मी के स्वागत में सजावट करते हैं/दीप जलाते हैं/पटाखे चलाते हैं(पर भूल जाते हैं-प्रदूषण को,अहिंसा को) दीपावली दो महान कार्यों के लिये मनायी जाती
Recent Comments