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संयम
संयम जीवन है (इसमें मरण करके कोई नहीं जाता), असंयम ही मरण है । आ. श्री विद्यासागर जी
संयम / तप
संयम बाड़ है, पापों को रोकने के लिये । तप अग्नि है, उन्हें जलाने के लिये, पर पुण्य सबसे अंतिम समय में जलते हैं ।
व्रत / संयम / तप
व्रत – Break, संयम – सावधानी पूर्वक Driving, तप – Full Speed से Drive करना । संयम में मन मोड़ा जाता है, तप में मन
विरक्ति / संयम
विरक्ति – पापों से बचना, संयम – प्रवृति में सावधानी । मुनि श्री प्रमाणसागर जी
संगति
जैसे संगति और संयम शब्दों में एकरूपता दिखती है, ऐसे ही संयम निभाने में भी संगति का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान है।
संयम
यम आने से पहले अपने विकारों के लिए संयम के हथियार लिए, ख़ुद यम बन जाओ ।
नियम/संयम
नियम – प्रतिज्ञा लेना, बाह्य क्रिया । संयम – विरक्तिपूर्वक मन को अनुशासित करना, अंतरंग क्रिया ।। चिंतन
संयम/असंयम
संयम मशीन में ड़ालने वाला तेल है, असंयम मशीन में कंकड़ पत्थर है । ड़ा. एस. एम. जैन
नियम/संयम
नियम/संयम सज़ा नहीं है, ये तो जीवन की सज़ावट के लिये होते हैं ।
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