Tag: भाव

भाव

नाटक की परिभाषा – बिना भाव की क्रिया । क्या हम भी धार्मिक क्रियायें ऐसे ही तो नहीं कर रहे हैं ?

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भाव / क्रिया

क्रिया साँचा है, भाव मूर्ति, विडंबना यह है कि हम साँचे को ही मूर्ति मानना शुरू कर देते हैं । (विपुल-फरीदाबाद)

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भाव

दुकानदार माल से मालदार नहीं, भावों से मालदार बनता है । आचार्य श्री विद्यासागर जी

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भाव

भाव सहित बिना माला (उँगलियों पर) के भी मालामाल हो सकते हैं । भाव रहित सोने की माला फेरने से भी सूने रह सकते हैं

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भाव / क्रिया

इन दोनों में महत्त्वपूर्ण कौन ? गुरू पर Attack करने वाले से बचाने वाला युद्ध करता है – क्रिया दोनों Same, पर भाव अलग अलग;

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भाव

दोषी को दोषी माना तो द्वेष होगा, दोषी को रोगी मानो, सहानुभूति होगी/भाव सुधरेंगे । क्षु. श्री गणेशप्रसाद वर्णी जी

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भाव / अभाव / प्रभाव

कोई भी व्यक्ति आपके पास तीन कारणों से आता है ! भाव से,अभाव से या प्रभाव से । यदि भाव से आया है तो उसे

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प्रभाव

धर्म का प्रभाव क्यों नहीं हो रहा ? क्योंकि हम जीवन में धर्म का अभाव महसूस नहीं करते हैं , इसलिये धर्म जानने/ समझने के

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मंगल आशीष

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