Tag: वीतरागता

वीतरागता

वीतरागता – एक शब्द ही हमारा धर्म है, सच्चे देव, गुरु, शास्त्र की पहचान है/उनका मापदंड़ है । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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अहिंसा और वीतरागता

वैसे तो रागद्वेष भी हिंसा है । पर प्रारम्भिक दशा में अहिंसा को आचार में लें, बाद में विचार में भी । मुनि श्री प्रमाणसागर

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रुचि

अरुचि द्वेष है, रुचि ना होना वीतरागता ।

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आत्मदर्शन

दर्पण में साफ देखना चाहते हो तो :- उसे साफ रखना होगा यानि व्यसन रहित । स्थिर रहे यानि कषाय रहित । अनावरित रहे यानि

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वीतरागता

वीतरागता से अन्तर्मुहूर्त में मुक्ति मिल सकती है, आराधना से नहीं । क्योंकि आराधना तो जानने की प्रक्रिया है । आचार्य श्री विद्यासागर जी

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मंगल आशीष

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