Tag: श्रीमति शर्मा
चिंता / प्रसन्नता
विचारों/भावनाओं को नियंत्रित करना कठिन है, क्रियाओं को आसान । पर भावनायें और क्रियायें आपस में Connected रहती हैं । सो क्रियाओं में प्रसन्नता दर्शायें,
सुख / आनंद
अकारण सुख प्राप्ति को आनंद कहते हैं। (श्रीमति शर्मा) कारणों में सुख ढूढना बंद कर दें, तब आत्मा का स्वाभाविक आनंद स्वत: ही आने लगेगा।
ख़्वाहिश
ख़्वाहिशें मनुष्य को जीने नहीं देतीं और मनुष्य ख़्वाहिशों को मरने नहीं देता । (श्रीमती शर्मा)
दौलत और साँसें
इनसान नीचे बैठा दौलत गिनता है… कल इतनी थी..आज इतनी बढ़ गयी.. ऊपर वाला हँसता है और इनसान की साँसें गिनता है… कल इतनी थीं..आज
भाव / अभाव / प्रभाव
कोई भी व्यक्ति आपके पास तीन कारणों से आता है ! भाव से,अभाव से या प्रभाव से । यदि भाव से आया है तो उसे
मैं / ईश्वर
हे ईश्वर ! आईना साफ किया तो “मैं” नजर आया, और “मैं” को साफ किया तो “आप” नजर आये । (श्रीमति शर्मा)
मंज़िल और रास्ते
अंदाज़ कुछ अलग है मेरे सोचने का… सबको मंज़िल की तमन्ना है, मुझे रास्ते की । (श्रीमति शर्मा)
मोह/प्रार्थना
मैत्री जब बंध जाती है तब मोह बन जाती है । जब अबंध होकर, लोक में फैल जाती है तब भगवान की प्रार्थना बन जाती
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