इच्छा / इज़्ज़त
कुछ बड़ा चाहिए तो जो है उसकी महिमा बढ़ाओ (बखान करो)/ उसके विज्ञापन बनो।
जिस धर्म/ व्रतादि से तुम्हारी इज़्ज़त बढ़ी है, तुम उस धर्म/व्रतादि की इज़्ज़त बढ़ाओ।
(तुम्हारी इज़्ज़त और बढ़ेगी)।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
कुछ बड़ा चाहिए तो जो है उसकी महिमा बढ़ाओ (बखान करो)/ उसके विज्ञापन बनो।
जिस धर्म/ व्रतादि से तुम्हारी इज़्ज़त बढ़ी है, तुम उस धर्म/व्रतादि की इज़्ज़त बढ़ाओ।
(तुम्हारी इज़्ज़त और बढ़ेगी)।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
One Response
इच्छा/इज्ज़त को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में इज्जत के लिए इच्छाओं को सीमित रखना एवं परमार्थ में इज्जत बढ़ाने का प्रयास करना परम आवश्यकता है। इसके लिए धर्म की इज्जत बढाना आवश्यक है।