रामकृष्ण मिशन के साधुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा… “इन्द्रिय-विजय कैसे करें?”
“इन्द्रियों को इन्द्रियों का काम करने दो।”
“वो तो हम करते ही हैं!”
“नहीं, तुम इन्द्रियों के सारे विषयों का भोग मन से करते हो; इन्द्रियों को तो सिर्फ़ माध्यम बनाते हो।”