ईर्ष्या
ईर्ष्या की ख़ासियत – जिनसे करोगे उसकी प्रगति होगी (सामने वाला Competition में और मेहनत करता है)।
प्रेम किया तो वह अकर्मण्य हो जायेगा (जैसे प्रेम में आप उसके काम करने लगोगे)।
मुनि श्री विनम्रसागर जी
ईर्ष्या की ख़ासियत – जिनसे करोगे उसकी प्रगति होगी (सामने वाला Competition में और मेहनत करता है)।
प्रेम किया तो वह अकर्मण्य हो जायेगा (जैसे प्रेम में आप उसके काम करने लगोगे)।
मुनि श्री विनम्रसागर जी
4 Responses
ईर्ष्या को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ईर्ष्या का भाव छोडना परम आवश्यक है।
Agar hum prem karenge, to jisse prem karte hai, use ‘अकर्मण्य’ kyun karna chahenge ? Ise
explain karenge, please ?
द्रोणाचार्य शस्त्र सिखाते थे, कृपाचार्य धर्म और नीति।
Okay.