उत्तम तप धर्म
कर्मों को क्षय करने के लिए जो किया जाए उसे तप कहते हैं।
गृहस्थों के लिए आजकल एक बड़ा तप है… सुबह जल्दी उठना। निशाचर कोई राक्षस नहीं होता। जो रात को देर तक जागता है, वह होता है। ज्योतिष शास्त्र में रात्रि के प्रहरों को राक्षस, निशाचरयोग, रुद्रकाल जैसे नाम दिए गए हैं। जो रात को देर तक जागते हैं उनका झुकाव व्यसनों की तरफ जल्दी होता है, प्रकृति के विपरीत विकृति में रहते हैं।
रात को कुछ एकाग्रता वाला काम करना है तो 2:00 बजे तक जगने की जगह 2:00 बजे उठकर क्यों नहीं कर सकते !
पहले तप का नाम है प्रायश्चित। गुरु के सामने ना कर पाओ तो कम से कम लिख लो, बाहर तो निकलेगा।
जीवन का विकास तभी शुरू होगा जब आप अपने आप को एक दिन में वचनों से तीन बार और मन से हर समय अधार्मिक और अज्ञानी मानेंगे।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 3 सितम्बर)




One Response
उत्तम तप धर्म का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। तप का आशय अपनी सुखो की इच्छाओं एवं कषाय पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। इसके साथ अपने कर्मो की निर्जरा करना परम आवश्यक है। दूध से मक्खन निकालतें है लेकिन जब तक उसको तपायें तभी ही घी यानी घृत तैयार होता है।