उन्नति आगे बढ़ना नहीं, ऊपर उठना है।
अवरोध आने पर पानी ऊपर उठता है।
हमारे जीवन में भी व्यवधान आयें तो उनको हटाने में अपनी शक्ति जाया न करें, उनको सीढ़ी बनाकर ऊपर उठें, तब ही उन्नति होगी।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 जून)
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उन्नति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए यदि उन्नति में रुकावट आती हैं तब भी एक एक कदम सीढियो पर चलकर उनति अवशय होगी।
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उन्नति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए यदि उन्नति में रुकावट आती हैं तब भी एक एक कदम सीढियो पर चलकर उनति अवशय होगी।