कषाय
कषाय* की कसाहट अंदर ज्यादा होती है, बाहर कम दिखती।
कषाय की सफाई कठिन है, उसके लिए साफ सुथरा स्थान रखना होगा जहाँ उसकी सम्मूर्छनों* की तरह उत्पत्ति ही ना हो।
विडंबना, हम कन्फेस भी करते साथ साथ जस्टिफाई भी करते रहते हैं।
कारगर उपाय… निरीक्षण नहीं, तो नियंत्रण नहीं।
* क्रोध मान माया लोभ।
** कीड़े मकोड़े।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 21 मई)




One Response
कषाय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कषाय यानी क़ोध लोभ एवं मोह का त्याग करना परम आवश्यक है।