छद्मस्थ…
जिनकी आत्मा में आवरण स्थित है। सूत्र (9/10) में दसवें गुणस्थान के बाद आया है सो ज्ञान/दर्शनावरण ही लेना।
सैद्धांतिक दृष्टि से 1-10 गुणस्थान तक सराग छद्मस्थ तथा 11-12 गुणस्थान में वीतराग छद्मस्थ।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 9/10)
One Response
छद्मस्थ को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।