जीव – विपाकी… जिसे जीव Direct Feel करें(जैसे घातिया कर्म)।
पुद्गल – विपाकी… जैसे शरीर नामकर्म,
Feel जीव ही करेगा लेकिन शरीर के माध्यम से, जैसे सुंदर-असुंदर शरीर।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
Share this on...
One Response
जीव पुद्ग़ल विपाकि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
One Response
जीव पुद्ग़ल विपाकि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।