दो अक्षर का (छोटा सा) “ज्ञान”, तीन तीन अक्षरों(बडों) वाले “दर्शन” तथा “चारित्र” के बीच जैसे माता पिता के बीच बच्चा, ताकि उछल-कूद न करे। जैसे दो पाटों के बीच नहर, यदि किनारे मज़बूत नहीं तो बाढ़ या जल गंतव्य तक पहुँचेगा ही नहीं।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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ज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु ज्ञान वही है जो आत्म हित हो सकता हो।
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ज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु ज्ञान वही है जो आत्म हित हो सकता हो।