आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे कि यदि कोई तुम्हारे आसपास धन के अभाव में ज्ञानार्जन से वंचित रह जाता है तो यह जिनवाणी का अपमान है और तुम्हारे लिए ज्ञानावरण कर्मबंध में कारण।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन- 5 मई)
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ज्ञानार्जन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञानार्जन का उपयोग करना परम आवश्यक है।
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ज्ञानार्जन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञानार्जन का उपयोग करना परम आवश्यक है।
Yahan par pujya ‘Jinvani’ ke gyaan ki baat ho rahi hai ya ‘लौकिक’ gyaan ki ? Ise clarify karenge, please ?
यहाँ पर जिनवाणी के अपमान से संबंध है तो धर्म के ज्ञान की ही बात ली जाएगी।
Okay.